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📑 In This Chapter Guide (Table of Contents)
1. अलंकार की परिभाषा एवं दो मुख्य वर्ग
जिस प्रकार आभूषण (गहने) शरीर की सुंदरता बढ़ाते हैं, उसी प्रकार काव्य के सौंदर्य और चमत्कार को बढ़ाने वाले धर्म या साधन अलंकार कहलाते हैं।
- शब्दालंकार: जहाँ शब्दों के विशिष्ट प्रयोग या वर्णों की आवृत्ति के कारण काव्य में सौंदर्य व चमत्कार उत्पन्न हो (अनुप्रास, यमक, श्लेष)।
- अर्थालंकार: जहाँ शब्दों के अर्थ के कारण काव्य में रमणीयता व चमत्कार उत्पन्न हो (उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण)।
2. प्रमुख शब्दालंकार (अनुप्रास, यमक, श्लेष)
- 1. अनुप्रास अलंकार: जहाँ समान वर्णों (व्यंजनों) की बार-बार आवृत्ति हो:
उदाहरण: "तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।" ('त' वर्ण की आवृत्ति)।
उदाहरण: "चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में।" - 2. यमक अलंकार: जहाँ एक ही शब्द एक से अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ भिन्न-भिन्न हो:
उदाहरण: "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। या खाए बौराय जग, या पाए बौराय।"
यहाँ पहले 'कनक' का अर्थ धतूरा और दूसरे 'कनक' का अर्थ सोना (स्वर्ण) है। - 3. श्लेष अलंकार: 'श्लेष' का अर्थ है चिपका हुआ। जहाँ कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो परंतु प्रसंगवश उसके एक से अधिक अर्थ निकलते हों:
उदाहरण: "रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।"
यहाँ 'पानी' शब्द के तीन अलग-अलग अर्थ हैं: मोती के संदर्भ में चमक, मनुष्य के संदर्भ में प्रतिष्ठा/इज्जत, तथा चूने/आटे के संदर्भ में जल।
3. प्रमुख अर्थालंकार (उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण, अतिशयोक्ति)
- 1. उपमा अलंकार: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी प्रसिद्ध वस्तु से गुण, रूप या धर्म के आधार पर की जाए।
पहचान के वाचक शब्द: सा, सी, से, सम, समान, सरिस, जैसा।
उदाहरण: "पीपर पात सरिस मन डोला।" (मन की चंचलता की तुलना पीपल के पत्ते से की गई है)।
उदाहरण: "हरिपद कोमल कमल से।" - 2. रूपक अलंकार: जहाँ उपमेय और उपमान में अत्यधिक समानता के कारण अभेद (एक रूप) स्थापित कर दिया जाए (वाचक शब्द लुप्त रहता है, बीच में योजक चिह्न आता है):
उदाहरण: "मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।" (चंद्रमा को ही खिलौना मान लिया गया है)।
उदाहरण: "चरण-कमल बंदौ हरि राई।" - 3. उत्प्रेक्षा अलंकार: जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए:
वाचक शब्द: मानो, मनहु, जानो, जनु, ज्यों।
उदाहरण: "सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात। मनहु नीलमनि सैल पर, आतप पर्यो प्रभात।" - 4. अतिशयोक्ति अलंकार: जहाँ किसी बात को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाए:
उदाहरण: "आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।" - 5. मानवीकरण अलंकार: जहाँ जड़ प्रकृति (पेड़, बादल, हवा, फूल) पर मानवीय भावनाओं और चेष्टाओं का आरोप किया जाए:
उदाहरण: "मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।" (बादलों को दामाद की तरह सज-धज कर आते हुए दिखाया गया है)।
उदाहरण: "फूल हंसे कलियां मुसकाईं।"
💡 Frequently Asked Questions (FAQ)
❓ उपमा और रूपक अलंकार में क्या अंतर है?
उपमा अलंकार में दो वस्तुओं की तुलना की जाती है और "सा, सी, सम" जैसे वाचक शब्द मौजूद रहते हैं (जैसे: "मुख चंद्रमा के समान सुंदर है")। रूपक अलंकार में तुलना के बजाय दोनों को एक ही मान लिया जाता है और वाचक शब्द नहीं होता (जैसे: "मुख ही चंद्रमा है")।
❓ "काली घटा का घमंड घटा" में कौन-सा अलंकार है?
यहाँ यमक अलंकार है। "घटा" शब्द दो बार आया है — पहली बार इसका अर्थ "काले बादल" है तथा दूसरी बार इसका अर्थ "कम होना" (घमंड कम होना) है।
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